बेशिक शिक्षा (निजी या सरकारी)और हमारा दायित्व (Undoubtedly education (private or governmental) and our liability)

✒अनन्त राम की कलम से✒

Undoubtedly education (private or governmental) and our liability
*******************
Education is the basis of life, the imagination of a civilized society without education is fantasy. If education is not accessible at all, then that society is not civilized, that is, the development of a civilized culture is impossible.
The civilized society is a symbol of a developed country, indicating a good business country, is the cause of unemployment, the endless problems of communalism, rape, infidelity of children, corruption, inequality, discrimination, rude debilitating problems.
Are these problems in our country today? No. What’s the reason? Need detailed modtion.
In some society, can some people become good and virtuous by virtue of being good and virtuous?
It is possible, but then when the gentleman who regards himself as virtuous does not consider himself high / different from other people, rather take responsibility for him walking and educating.
If this is not done then there is a great difference in birth and here it starts from dual policy.
An example of this is unconditional education. Government and private systems …. On the basic basis, the government system has been made for those people who are financially and socially backward or deprived of facilities and private (education) arrangements And it has almost become related to big pains. It has greatly increased the gap between rich and poverty and inequality.
It can be overcome, but then when this double education policy is eliminated, the same education system (government only) should be implemented and we will quickly create a decent society from inequality and ruggedness, then we are in the constitution The right to education under Right to Information Act 21A will prove true on a basic basis.
As long as this double education system is not abolished then what is the meaning of the right of education 21.
Let’s consider the dual effect of this dual education policy of governments and remove it and become a participant in the creation of a decent, equitable and developed society and capable citizens. Author’s own opinion

बेशिक शिक्षा (निजी या सरकारी)और हमारा दायित्व
***********************
शिक्षा जीवन का आधार है,बिना शिक्षा के सभ्य समाज की कल्पना कोरी कल्पना है।अर्थात यदि शिक्षा सर्व सुलभ न हो तब वह समाज सभ्य नही है अर्थात वहां एक सभ्य संस्कृति का विकास असम्भव है।
सभ्य समाज एक विकसित देश का प्रतीक है,एक अच्छे व्यापारिक देश का सूचक है,बेरोजगारी का नाशक है,साम्प्रदायिकता,बलात्कार,बहू-बेटियों की बेईज्जती, भ्रष्टाचार ,असमानता, विभेद जैसे असभ्य दुर्गुण युक्त समस्याओं का अन्त है।
क्या आज हमारे देश में इन समस्याओं का अन्त हो चुका है? नहीं।इसका कारण क्या है? विस्तृत मन्थन की जरूरत है।
किसी भी समाज में कुछ लोगों के अच्छे एवं गुणी हो जाने से क्या पूरा समाज गुणी हो सकता है?
ऐसा सम्भव है लेकिन तब जब अपने को गुणी मानने वाले सज्जन अपने को अन्य लोगों से उच्च /भिन्न न समझें,बल्कि उन्हें साथ लेकर चलने एवं शिक्षित करने की जिम्मेदारी का वहन करें।
यदि ऐसा नहीं किया जाता है तब वहाँ बहुत बड़ा अन्तर जन्म लेता है औऱ यहीं से शुरुआत होती है दोहरी नीति की।
इसका एक उदाहरण बेशिक शिक्षा भी है..सरकारी एवं निजी व्यवस्था ….बेसिक आधार पर सरकारी व्यवस्था आज उन लोगों के लिए की गयी है जो आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े हैं या सुविधाओं से वंचित हैं तथा निजी (शिक्षा)व्यवस्था सम्पन्न एवं बड़े तपके से लगभग सम्बंधित हो चुकी है। इसने अमीरी एवं गरीबी की एवं असमानता की खाई को बहुत अधिक बढ़ा दिया है।
इसे दूर किया जा सकता है परन्तु तब जब इस दोहरी शिक्षा नीति को खत्म करके एक ही शिक्षा व्यवस्था (केवल सरकारी) लागू कर दी जाय और हम शीघ्रता से असमानता  एवं असभ्यता से दूर हटकर सभ्य समाज का निर्माण कर लेंगे ,तब हमें संविधान में जो अधिकार 21क के अधीन शिक्षा का अधिकार मिला है बेसिक आधार पर सत्य साबित होगा।
जब तक इस दोहरी शिक्षा व्यवस्था को खत्म नहीं किया जाता है तब तक 21क.शिक्षा का अधिकार का क्या अर्थ है।
आइए सरकारों की इस दोहरी शिक्षा नीति के दुस्प्रभाव पर बिचार करें और इसे दूर करके एक सभ्य ,समतामूलक एवं विकसित समाज  एवं सुयोग्य नागरिक के निर्माण में भागीदार बनें।। लेखक की अपनी राय।

A Big Vision News Network India

About A Big Vision News Network India

Leave a Reply

*